क्या था नमक सत्याग्रह : जब नमक ने बदल दी देश की तकदीर

07 Jun
नमक सत्याग्रह

नमक सत्याग्रह :-

महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए प्रमुख आंदोलन में से एक नमक सत्याग्रह भी था इसे डांडी मार्च के नाम से भी जाने जाते हैं! नमक पर ब्रिटिश राज्य एकाधिकार के खिलाफ 12 मार्च 1930 में बापू ने अहमदाबाद के परिस्थितीत साबरमती आश्रम से दांडी गांव तक 24 दिनों का पैदल मार्च निकाला था! ऐसा के साथ शुरू हुआ या मार्च ब्रिटिश राज्य के खिलाफ बगावत का बिगुल बनकर उभरा उस दौर में ब्रिटिश हुकूमत ने चाय कपड़ा यहां तक कि नमक जैसी चीजों पर अपना एकाधिकार स्थापित कर रखा था!
उस समय भारतीय को नमक बनाने का अधिकार नहीं था हमारे पूर्वजों को इंग्लैंड से आने वाले नमक के लिए कई गुना ज्यादा पैसे देने होते थे!
नमक गांधीजी के लिए बड़ा प्रतिक सिद्धांत हुआ चुकी नमक मानव के भोजन का महत्वपूर्ण और आधारभूत हिस्सा है! खतरनाक करके मुद्दों को उठाकर गांधीजी ने हुकूमत की निर्दयता की उदगार कर दिया अनोखा था!
यह सत्याग्रह डांडी मार्च करने वाले लोगों के हाथ में एक भी झंडा तक नहीं था इस सत्याग्रह आंदोलन सरकार को हिला कर रख दिया और दुनिया में उत्सुकता जगा दी थी गांधीजी के बाद पूरे देश में नमक बनाना शुरू कर दिया पूरे देश को एकजुट करके भारतीय समुद्र तट पर नमक आसानी से बना जा सकता था!
लेकिन किसी भी भारतीय को नमक बनाने की इजाजत नहीं थी इस मुद्दे ने पूरे देश में जाति राज्य नष्ट और भाषा की सभी दीवार तोड़ दी या उन भारतीयों महिलाओं के लिए भी एक सशक्ति मुद्दा था!
जो अपने परिवार के नेतृत्व में 240 मील लंबी यात्रा दांडी स्थित समुंद्र किनारे पहुंची जाओ उन्होंने सार्वजनिक रूप से नमक बनाकर नमक कानून तोड़ा इस दौरान उन्होंने समुंद्र किनारों से खिली धूप के बीच प्राकृतिक नमक उठाकर उनका क्रिस्टलीकरण कर नमक बनाया उसके साथ 79 अनु यात्रियों ने भी यात्रा की थी जिस की प्रगति देखकर भारतीय ने अरब सागर के तट पर दांडी तक के रास्ते में उनका पूरा उत्साहवर्धन किया!


इसे भी जरूर पढ़ें


क्यों हुआ नमक सत्याग्रह

‘नमक’ मानव जीवन के लिए ज़रूरी मुलभूत इकाइयों में से एक है, पर ब्रटिश साम्राज्य में इस नमक के लिए भी भारतीयों को भारी कर देना पड़ता था, साथ ही, उन्हें खुद अपने ही देश में नमक बनाने की अनुमति नहीं थी, आम जनता की परेशानियों और मुश्किलों को देखते हुए, गाँधी जी ने कई बार सरकार से इस संदर्भ में चर्चा की, बहुत बार कई राजनेताओं और सेनानियों ने ब्रिटिश सरकार से उनकी दमनकारी नीतियों को खत्म कर, भारत में ‘नमक बनाने’ को कर-रहित कर देने के लिए कहा, पर ब्रिटिश सरकार टस से मस न हुई, ऐसे में और कोई रास्ता न देखते हुए, गाँधी जी ने इस अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाने का फ़ैसला किया।

दांड़ी यात्रा के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी…

1. दांडी यात्रा यानि नमक सत्याग्रह की शुरुआत 12 मार्च 1930 को हुई थी। महात्मा गांधी के नेतृत्व में 24 दिन का यह अहिंसा मार्च 6 अप्रैल को दांडी पहुंचा और अंग्रेजों का बनाया नमक कानून तोड़ा।

2. उस वक्त देश पर अंग्रेजों का राज था और किसी भी भारतीय के नमक इकट्ठा करने या बेचने पर रोक थी। यही नहीं भारतीयों को नमक अंग्रेजों से ही खरीदना पड़ता था। नमक बनाने के मामले में अंग्रेजों की मोनोपॉली चलती थी और वह नमक पर भारी टैक्स भी वसूलते थे। नमक सत्याग्रह अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ एक बड़ी रैली थी।

3. दांडी में समुद्र किनारे पहुंचकर महात्मा गांधी ने गैर-कानूनी तरीके से नमक बनाया और अंग्रेजों का नमक कानून तोड़ा। आगे चलकर यह एक बड़ा नमक सत्याग्रह बन गया और हजारों लोगों ने न सिर्फ नमक बनाया, बल्कि अंग्रेजी कानून तो धता बताते हुए गैर-कानूनी नमक खरीदा भी।

4. नमक सत्याग्रह की शुरुआत करीब 80 लोगों के साथ हुई थी। जैसे-जैसे यह यात्रा अहमदाबाद से दांडी की तरफ बढ़ी, वैसे-वैसे इस 390 किमी लंबी यात्रा में लोग जुड़ते चले गए। दांड़ी पहुंचने तक इस अहिंसक नमक सत्याग्रह में 50 हजार से ज्यादा लोग जुड़ चुके थे।

5. नमक सत्याग्रह जिस तरह से बिना किसी हिंसा के आगे बढ़ा और बड़ी ही शालीनता से अंग्रेजों के एकतरफा कानून को तोड़ा गया, उसकी दुनियाभर में चर्चा होने लगी। इस दांडी मार्च ने अंग्रेजी हुकूमत को भी हिलाकर रख दिया था। नमक सत्याग्रह को अखबारों ने खूब जगह दी और इससे भारत के स्वाधीनता आंदोलन को नई दिशा भी मिली।

राष्ट्रीय नमक सत्याग्रह स्मारक

राष्ट्रीय नमक सत्याग्रह स्मारक में दांडी यात्रा में भाग लेने वाले 80 लोगों की प्रतिमाएं हैं। इस स्मारक में गांधीजी के 18 फीट ऊँची मूर्ती बनाई गयी है। दांडी यात्रा से जुड़े 24 स्थानों का समृतिपथ बनाया गया है।
इस स्मारक में 41 सोलर तरी बनाए गये हैं जो प्रतिदिन 144 किलोवाट बिजली का उत्पादन करेंगे, इस बिजली से स्मारक को आवश्यक विद्युत् आपूर्ति प्राप्त होगी।
इस स्मारक का निर्माण 110 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है।

अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

Related posts