इंडिया गेट:- भारत की शान,दिल्ली की जान , जानें क्या कुछ है …

02 Sep
इंडिया गेट

दिल्ली के सभी मुख्य आकर्षणों में से पर्यटक, इंडिया गेट जाना सबसे ज्यादा पसंद करते हैं। दिल्ली के ह्रदय में स्थापित यह भारत के एक राष्ट्रीय स्मारक के रूप में शान से खड़ा है। 42 मी. ऊंचे इस स्मारक का निर्माण पेरिस के आर्क-डी-ट्राईओम्फे की तरह किया गया है।

इंडिया गेट कब बना?

इंडिया गेट 1931 में बना!


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इंडिया गेट का डिजाइन किसने तैयार किया?

इंडिया गेट का डिजाइन सर एडवर्ड लुटियन ने तैयार किया!

इंडिया गेट कहां पर स्थित है?

इंडिया गेट नई दिल्ली के राजपथ पर स्थित है! यह 43 मीटर ऊंचा राष्ट्रीय स्मारक है!

 

 

इंडिया गेट का निर्माण एवं इसका इतिहास –

भारत की राजधानी दिल्ली के राजपथ मार्ग पर स्थित इंडिया गेट निर्माण 1931 ईसवी में किया गया था।

साल 1914 से 1918 के बीच चले पहले विश्व युद्ध और तीसरे एंग्लो-अफगान युद्ध में ब्रिटिश इंडियन आर्मी के करीब 90 हजार सैनिकों ने अपने शक्तिशाली ब्रिटिश साम्राज्य की रक्षा के लिए बड़ी वीरता के साथ दुश्मन सेना से युद्ध लड़ा था, हालांकि इस युद्ध में करीब 82 हजार सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी।

इस युद्ध के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए सैनिकों के सम्मान और उन्हें श्रंद्धाजंली अर्पित करने के लिए दिल्ली के राजपथ में इस राष्ट्रीय स्मारक इंडिया गेट का निर्माण किया गया था।

शुरुआत में इस स्मारक का नाम ”ऑल इंडिया वॉर मेमोरियल” रखा गया था, लेकिन बाद में इसका नाम बदलकर इंडिया गेट कर दिया गया।

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीय सेना के हजारों जवान फ्लैंडर्स मेसोपोटामिया, पूर्वी अफ्रीका गैलीपोली, फ्रांस समेत कई अन्य स्थानों पर लड़ते हुए शहीद हो गए थे, उन सैनिकों के सम्मान और स्मृति में ही इस अद्भुत शहीद स्मारक का निर्माण किया गया था।

लाल बलुआ पत्थर और ग्रेनाइट से निर्मित भारत की इस भव्य शहीद स्मारक की दीवारों में बेहद सृजनात्मक और अनूठे तरीके से इन हजारों शहीदों का नाम भी लिखो गए हैं।

इसके साथ ही आपको बता दें कि 15 अगस्त, 1947 से पहले जब देश ब्रिटिशों की गुलामी सह रहा था, तब इंडिया गेट के सामने किंग जॉर्ज वी की एक प्रतिमा स्थापित थी।

लेकिन आजादी मिलने के बाद इस प्रतिमा को हटाकर ब्रिटिश राज की अन्य प्रतिमाओं के साथ कोरोनेशन पार्क में स्थापित कर दिया गया था। देश की इस अनमोल धरोहर में समय-समय पर कई संसोधन भी किए जाते रहे हैं।

जिसकी वजह से दिल्ली के राजपथ पर स्थित यह स्मारक सैनिकों का एक महत्वपूर्ण स्मारक बन गया है।

साल 1971 में भारत-पाकिस्तान के युद्ध के समय शहीद होने वाले तमाम भारतीय सैनिको के सम्मान में यहां ”अमर जवान ज्योति” की स्थापना की गई, जहां साल के 365 एवं 24 घंटे, हमेशा ही सैनिकों के सम्मान में एक लौ जलती रहती है।

इंडिया गेट की क्या खूबी है? What is the specialty of India Gate?

इंडिया गेट स्वतंत्र भारत का राष्ट्रीय स्मारक है! इसे मूल रूप से अखिल भारतीय युद्ध स्मारक कहा जाता है! इंडिया गेट को पहले किंग्सवे कहा जाता था! यह स्मारक पैरिस के आर्क डे टायम्फ से प्रेरित है! मूल रूप से अखिल भारतीय युद्ध स्मारक के रूप में जाने जाने वाले इस स्मारक का निर्माण अंग्रेज शासकों द्वारा उन 90000 भारतीय सैनिकों की स्मृति में क्या गया था! जो ब्रिटिश सेना में भर्ती होकर प्रथम विश्व युद्ध और अफगान युद्ध में शहीद हुए थे!

यूनाइटेड किंग्डम के कुछ सैनिकों और अधिकारियों सहित 133000 सैनिकों के नाम गेट पर लिखा हुआ है!
जो लाल और पीले बलुआ पत्थरों से बना है! यह स्मारक देखने के लायक है! स्मारक रात के समय में तिरंगे की तरह लगता है!
इंडिया गेट के सामने प्रतीक की जगह एक छतरी है! इंडिया गेट के मेहराब के नीचे अमर जवान ज्योति स्थापित है! यहां एक राइफल के ऊपर सैनिकों की टोपी सजी हुई है! जिसके चारों कोनों में हमेशा एक ज्योति जलती रहती है!

उस अमर जवान ज्योति पर हर साल प्रधानमंत्री और तीनों सेना अध्यक्ष पुष्प चक्र चढ़ाकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं!
इंडिया गेट की दीवारों पर हजारों सैनिकों के नाम लिखे हैं! दिल्ली की महत्वपूर्ण सड़क इंडिया गेट के कोनों से होकर निकलती है! रात के समय यहां मेले जैसा माहौल होता है! और 325 मीटर के व्यास में स्थित इंडिया गेट का क्षेत्र 3,06,000 वर्ग मीटर के क्षेत्रफल में फैला है!
इंडिया गेट के सामने एक छतरी स्थित है!
इस छतरी के नीचे किसी जमाने में जॉर्ज पंचम की भव्य मूर्ति हुआ करती थी!
भारत के आजाद होने के बाद उस मूर्ति को सरकार ने वहां से हटाकर कोरो नेशनल पार्क में रखवा दिया! हर वर्ष गणतंत्र दिवस पर निकलने वाली परेड राष्ट्रपति भवन से शुरू होती है! इंडिया गेट से होते हुए लालकिले तक पहुंचती है!

इंडिया गेट

इंडिया गेट में अमर जवान ज्योति –

अमर जवान ज्योति या ज्वाला की अमर सेना का निर्माण 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद उन सभी सैनिकों के सम्मान में किया गया था, जिन्होंने 1971 में भारत-पाक युद्ध में अपनी जान गंवाई थी। स्मारक का उद्घाटन भारत के तत्कालीन प्रधान मंत्री, इंदिरा गांधी द्वारा 26 जनवरी 1972 को किया गया था। ‘अमर जवान’ को सोने की चौपाई के चारों ओर लिपिबद्ध किया गया है। सेनोटैफ के शीर्ष पर एक उल्टे एल 1 ए 1 स्व-लोडिंग राइफल को एक सैनिक के हेलमेट के साथ रखा गया है। संगमरमर के पेडल चार कलशों से बंधे हैं, जिनमें से एक में लगातार जलती हुई ज्वाला है। स्मारक पर भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और वायु सेना के सैनिकों का 24/7 पहरा रहता है।

अमर जवान ज्योति हमेशा कैसे जली रहती है –

“अमर जवान ज्योति” लॉ सीएनजी पर चलती है, जिसकी आपूर्ति एक पाइपलाइन के माध्यम से की जाती है। कस्तूरबा गांधी मार्ग से ज्योति तक 500 मीटर की पाइपलाइन बिछाई गई है ताकि सभी ज्योति जल सकें। ज्योति के बेस पर 4 ज्योत हैं, जिसमें से सालभर केवल एक जोत जलाई जाती है। बाकी की सभी लॉ 15 अगस्त और 26 जनवरी को जलती हैं। पांच दिन तक इन लॉ को जलाए रखने के लिए 16 एलपीजी सिलेंडरों का इस्तेमाल किया जाता है। बता दें कि एक एलपीजी सिलेंडर एक ज्योति को डेढ़ दिन तक जलाए रखने की क्षमता रखता है। स्मारक की छत पर सिलेंडरों को स्टॉक किया जाता है।

 

इंडिया गेट के पास आकर्षण  Attractions near India Gate

  • राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (750 मीटर)
  • चिल्ड्रन पार्क (900 मीटर)
  • आधुनिक कला की राष्ट्रीय गैलरी (1.4 मीटर)
  • पुराण किला (2.2 किमी)
  • राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र (2.5 किमी)
  • अग्रसेन की बावली (2.5 किमी)
  • जंतर मंतर (2.9 किमी)
  • राष्ट्रपति भवन (2.7 किमी)
  • लोधी गार्डन (2.9 किमी)
  • कनॉट प्लेस (4 किमी)
  • राज घाट (5.2 किमी)
  • चांदनी चौक (5.6 किमी)
  • जामा मस्जिद (5.8 किमी)

 

दिल्ली के इंडिया गेट पर कुल कितने स्वतंत्रता सेनानियों के नाम है,How many freedom fighters are named at Delhi’s India Gate,

 

दिल्ली के इंडिया गेट पर कुल 95,300 स्वतंत्रता सेनानियों के नाम है…

  • मुसलमान : 61395
  •  सिख : 8050
  •  पिछड़े : 14480
  •  दलित : 10777
  •  सवर्ण : 598
  •  संघी : 00

 

निकटतम मेट्रो स्टेशन से इंडिया गेट तक  Nearest Metro Station to India Gate

इंडिया गेट से निकटतम मेट्रो स्टेशन केंद्रीय सचिवालय स्टेशन है। यह मेट्रो रेलवे की पीली और बैंगनी लाइन पर स्थित है और इंडिया गेट से इसकी दूरी 2.3 किमी है। वहां से, या तो पैदल चलना या ऑटो के लिए चयन करना काम कर सकता था और वहां तक ​​पहुंचने में मुश्किल से 5 मिनट लगते हैं। ऑटो लगभग Rs 30 या रु 40  में आपको केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन से इंडिया गेट तक ले जाने में  लेंगे । इंडिया गेट से 3 किमी की दूरी पर मेट्रो स्टेशन के पास दूसरा बाराखंभा स्टेशन है।

वहाँ से, एक ऑटो या टैक्सी को चुना जा सकता था और इसे वहाँ होने में कुल मिलाकर लगभग 15 मिनट लगेंगे। आसपास के अन्य मेट्रो स्टेशन जो आप यात्रा करने का विकल्प चुन सकते हैं, प्रगति मैदान मेट्रो स्टेशन है और यह बाराखंभा स्टेशन की तरह लगभग समान दूरी पर भी है। ऑल इंडिया वॉर मेमोरियल के रूप में भी जाना जाता है, इंडिया गेट ठीक वास्तुकला काम का एक उदाहरण है जिसका निर्माण 21 वीं शताब्दी में एडविन लुटियन द्वारा किया गया था। यदि आप दिल्ली में हैं, तो यह सलाह दी जाती है कि एक बार यहां अवश्य जाएँ क्योंकि यह न केवल देखने लायक है बल्कि उन सभी युवा और बहादुर सैनिकों की याद में बनाया गया है जो प्रथम विश्व युद्ध के दौरान मारे गए थे।

 

 

इंडिया गेट के बारे में कुछ महत्वपूर्ण, रोचक और दिलचस्प तथ्य – (Facts about India gate in hindi)…..

  1. देश के लिए मर मिटने वाले शहीदों की याद में बनाया गया यह स्मारक भारत के सबसे बड़े युद्ध स्मारकों में से एक है, जिसे उस समय के मशहूर वास्तुकार एडविन लुटियंस ने डिजाइन किया था।
  2. इंडिया गेट को शुरुआत में अखिल भारतीय युद्ध स्मारक के तौर पर जाना जाता था, लेकिन फिर बाद में इसका नाम इंडिया गेट कर दिया गया।
  3. करीब 42 मीटर ऊंचे इस राष्ट्रीय स्मारक की आधारशिला 10 फरवरी, 1921 को ड्यूक ऑफ कनॉट ने रखी थी, जबकि इसका निर्माण काम को पूरा होने में10 साल का लंबा वक्त लग गया था।
  4. भारत की इस सबसे बड़े युद्ध स्मारक के दीवारों पर प्रथम विश्व युद्ध और तीसरे एंग्लों-अफगान युद्ध में शहीद हुए हजारों भारतीय सैनिकों के नाम शिल्पित किए गए हैं। जबकि इसे पेरिस में स्थित ”आर्क डी ट्रायम्फ” की तर्ज पर डिजाइन किया गया है।
  5. इंडिया गेट के तल पर बनी अमर जवान ज्योति को भारत-पाक के युद्ध में शहीद हुए हजारों भारतीय सैनिकों की याद में बनाया गया है, जिसमें हमेशा एक लौ शहीदों की स्मृति और उन्हें श्रद्धांजली देने के लिए जलती रहती है।
  6. इंडिया गेट पर बने अमर जवान ज्योति का उद्घाटन देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था और 26 जनवरी के दिन देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों को श्रद्धांजली अर्पित की थी, तब से लेकर आज तक गणतंत्र दिवस के राष्ट्रीय पर्व के दौरान हर साल देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति एवं तीनों सेनाओं के प्रमुखों द्धारा अमर जवान ज्योति पर पूरे श्रद्धा भाव और सच्चे मन से शहीदों को श्रद्धांजली दी जाती है।
  7. अमर जवान ज्योति पर एक स्व-लोडिंग राइफल और सैनिक का हेलमेट भी रखा गया है, जो कि इसकी शोभा को और अधिक बढ़ा रहा है।
  8. करीब 42 मीटर ऊंचे इस शहीद स्मारक का निर्माण भरतपुर से लाए गए लाल और पीले पत्थरों का इस्तेमाल कर किया गया।
  9. इंडिया गेट, दिल्ली के सबसे प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है, जिसे खूबसूरती को देखने दुनिया के कोने-कोने से लोग आते हैं!
  10. दिल्ली में स्थित इंडिया गेट, दुनिया के सबसे बड़े वैश्विक युद्ध स्मारक के तौर पर भी मशहूर है, जिसके देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री द्धारा प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है। इसके साथ ही यह गणतंत्र दिवस परेड के आयोजन स्थल के रुप में भी जाना जाता है।
  11. दुनिया का सबसे बड़ा युद्द स्मारक होने के साथ-साथ यह एक प्रसिद्ध पिकनिक स्पॉट भी है, जहां लोग छुट्टियां मनाने और अपने दिमाग को तारोताजा करने के लिए जाते हैं।
  12. भारत के इस महत्वपूर्ण स्मारक के सामने बनी हुई छतरी में पहले जॉर्ज पंचम की मूर्ति स्थापित थी, लेकिन आजादी के बाद में इसके कोरोनेशन पार्क में स्थापित कर दिया गया था।
  13. इंडिया गेट के आस-पास बने हरे-भरे बगीचे , बोट क्लब और पार्क इसकी सुंदरता को और अधिक बढ़ाने का काम करते हैं।

दिल्ली में स्थित भारत का यह सबसे बड़ा युद्ध स्मारक इंडिया गेट सैनिकों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण स्थल है। इंडिया गेट, भारत की शान है जो कि देश के लिए अपनी जान की कुर्बानी देने वाले वीर सैनिकों की शहादत को याद दिलवाता है, इसलिए देश के इस सबसे बड़े शहीद स्मारक के प्रति समस्त भारतवासियों के ह्रद्य में अपूर्व सम्मान है।

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